Rohit

प्रेमानंद जी महाराज का जीवन स्वयं में भक्ति, वैराग्य और गुरु-कृपा का अद्भुत उदाहरण है। कहा जाता है कि उनका जन्म एक सामान्य कुल में हुआ था, बाल्यकाल से ही उनके मन में धर्म विषय कम और ईश्वर-चिंतन म युवावस्था में उन्होंने देखा कि दुनिया में सुख क्षणिक है-धन, मन और संबंध सब नश्वर हैं। इसी भाव ने उनके हृदय में वैराग्य उत्पन्न कर दिया। वे अपने घर-परिवार का त्याग कर सत्य और शांति की तलाश में निकल पड़े। अनेक स्थानों पर भटके, साधु-संतों से मिले, कठिन तप की और अंततः उन्हें एक सिद्ध गुरु का सान कहा गया

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प्रेमानंद जी महाराज का जीवन स्वयं में भक्ति, वैराग्य और गुरु-कृपा का अद्भुत उदाहरण है। कहा जाता है कि उनका जन्म एक सामान्य कुल में हुआ था, बाल्यकाल से ही उनके मन में धर्म विषय कम और ईश्वर-चिंतन म युवावस्था में उन्होंने देखा कि दुनिया में सुख क्षणिक है-धन, मन और संबंध सब नश्वर हैं। इसी भाव ने उनके हृदय में वैराग्य उत्पन्न कर दिया। वे अपने घर-परि...阅读更多

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