आखिरी चाय" रवि हर सुबह अपनी चाय की दुकान पर बैठा रहता था। उसकी दुकान छोटे से गाँव के चौराहे पर थी। आज सुबह भी वह चाय बनाते हुए सोच रहा था कि जिंदगी कितनी सादा हो गई है। ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई थी, और वह अकेला सा महसूस करने लगा था। तभी, एक बूढ़ा आदमी उसकी दुकान पर आया। सफेद दाढ़ी, झुका हुआ शरीर, और हाथ में एक पुराना झोला। वह धीरे-धीरे आया ...阅读更多